Monday, 6 November 2017

कभी खेत में करता था काम, आज है प्रो-कबड्डी का सबसे महंगा खिलाड़ी

कभी खेत में करता था काम, आज है प्रो-कबड्डी का सबसे महंगा खिलाड़ी
'आईपीएल' के बाद अगर भारत में किसी लीग ने जोर पकड़ा है तो वो है 'पीकेएल'। जी हां। आप सही समझे। हम प्रो-कबड्डी लीग की ही बात कर रहे हैं। साल 2014 में शुरू हुई इस लीग ने हमारे देसी खेल कबड्डी को अंतराष्ट्रीय स्तर पर जो पहचान दिलवाई है, उससे हर कोई खासा उत्साहित है। 
तीन साल पहले जब प्रो-कबड्डी लीग की शुरुआत हुई तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि ये लीग भी आईपीएल की तरह इतनी मशहूर हो जाएगी। खैर, लीग को खास बनाने का श्रेय मूल रूप से तो इसके खिलाड़ियों को ही जाता है। कारण कि उन्हीं के बेहतरीन खेल की बदौलत तो पीकेएल आज हर किसी तक पहुंचा है। 
चूंकि पीकेएल की बात हो रही है तो उस खिलाड़ी की बात कैसे ना हो जो कभी खेत में काम करने वाला एक मामूली इंसान हुआ करता था। देखते ही देखते वो कबड्डी के इतिहास का सबसे महंगा खिलाड़ी बन गया। तो फिर देर किस बात की है। आइए जानते हैं पूरा मामला।

यूपी योद्धा के प्लेयर 

यूपी योद्धा के प्लेयर 
प्रो-कबड्डी लीग 2017 का रोमांच अब शुरू हो चुका है। इस बार नितिन तोमर, कबड्डी के सबसे महंगे खिलाड़ी साबित हुए हैं। यूपी योद्धा टीम ने उन्हें 93 लाख रुपये की बोली लगाकर खरीदा है।

हौंसले की कहानी

हौंसले की कहानी
जैसे गांव और गलियों का खेल समझे जाने वाले कबड्डी के खेल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वैसी ही कहानी नितिन तोमर की भी है। आप खुद जानिए कि आखिर किस तरह खेत में काम करने वाला एक मामूली किसान, कबड्डी का सबसे महंगा प्लेयर बन गया।  
एक किसान कैसे बना कबड्डी का बादशाह, आगे जाने पूरी कहानी।

पिता और दादा भी किसान 

पिता और दादा भी किसान 
22 साल के कबड्डी प्लेयर नितिन तोमर बागपत जिले के मलकपुर गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके परिवार में पिता जितेन्द्र तोमर (किसान), माँ (गृहणी) और दादा-दादी हैं।

दादी का है ये कहना 

दादी का है ये कहना 
नितिन की दादी कहती हैं कि,"वो बहुत मेहनती लड़का है। खेल के साथ-साथ बतौर नेवी अफसर भी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाता है। जब भी गांव आता है तो खेती करने में जुट जाता है।"
पहलवान बनने की चाह रखने वाले नितिन, कबड्डी की दुनिया में कैसे आ गए आगे जानिए।

पहलवान बनना चाहते थे नितिन  

पहलवान बनना चाहते थे नितिन  
बकौल नितिन, "मेरे दो चाचा अशोक और प्रहलाद तोमर पहलवान हैं। मैं भी बचपन से उनकी तरह पहलवान बनना चाहता था, लेकिन किस्मत ने मुझे कबड्डी से जोड़ दिया।"

पिछले सीजन अभिषेक के साथ 

पिछले सीजन अभिषेक के साथ 
नितिन ने आगे बताया, कबड्डी के पिछले सीजन में वे अभिषेक की टीम बंगाल वॉरियर की ओर से खेल चुके हैं। इस बार भी अभिषेक उन्हें खरीदना चाहते थे। इसके लिए अभिषेक ने 90 लाख की बोली भी लगाई, लेकिन यूपी योद्धा ने उन्हें 93 लाख में खरीद लिया। 
कबड्डी के खेल से नेवी में भर्ती होने तक कैसे गुजरा नितिन का सफर, अगली स्लाइड में जानते हैं। 

कबड्डी को लेकर कहा... 

कबड्डी को लेकर कहा... 
नितिन कहते हैं कि, 'बचपन में पढ़ाई से ज्यादा खेलकूद में मन लगता था। शौकिया तौर पर कबड्डी खेलता था, लेकिन जब धीरे-धीरे परफॉरमेंस अच्छा होने लगा तो टीचर्स ने इसे सीरियसली लेने की सलाह दी।'

तीनों सेनाएं हुई प्रभावित

तीनों सेनाएं हुई प्रभावित
जब एक बार नितिन, धनौरा गांव में कबड्डी टूर्नामेंट (क्षेत्रीय) खेलने गए थे। तब नितिन का हुनर देख प्रतियोगिता में शामिल आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की टीमें बहुत इम्प्रेस हुई। तीनों ने ही उन्हें जॉब ऑफर की।

नेवी को चुना 

नेवी को चुना 
तीनों जॉब ऑफर पर विचार करने के बाद नितिन ने नेवी को चुना। तभी से वो स्पोर्ट्स कोटा में नेवी की नौकरी कर रहे हैं। फिलहाल उनकी पोस्टिंग मुंबई में हैं।

सफलता का रहस्य 

सफलता का रहस्य 
नितिन की सफलता का रहस्य है, उनका जमीन से जुड़े रहना। आज भले ही वो कितने ही महंगे खिलाड़ी क्यों ना बन गए हों। मगर जब कभी भी अपने गांव जाते हैं तो अपने पिता के साथ काम करना नहीं भूलते।

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